CBI ने हरियाणा के IAS अधिकारी प्रदीप कुमार को 504 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में किया गिरफ़्तार
सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने हरियाणा के IAS अधिकारी प्रदीप कुमार को 30 जून, 2026 को गिरफ़्तार किया, जो उनके रिटायरमेंट (सेवा-निवृत्ति) का दिन था। उन्हें कई विभागों से जुड़े एक बड़े बैंकिंग घोटाले में सीधे तौर पर शामिल होने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था।
इस घोटाले का शुरुआती अनुमान ₹504 करोड़ था (और संबंधित जांच में यह बढ़कर ₹593 करोड़ तक पहुँच गया)। कुमार एजेंसी से बच रहे थे और गिरफ़्तारी से पहले लगभग एक हफ़्ते तक फ़रार रहे, जब तक कि उनकी लोकेशन का पता नहीं चल गया।
मामले की मुख्य जानकारी -
मुख्य आरोप: हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के सदस्य सचिव के तौर पर काम करते हुए, कुमार पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी नियमों को दरकिनार करते हुए जनता के पैसे की बड़ी रकम एक प्राइवेट बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की।
तरीका: सरकारी फंड, जिसे फ़िक्स्ड डिपॉज़िट (FD) के तौर पर रखा जाना था, उसे चंडीगढ़ में IDFC फ़र्स्ट बैंक की सेक्टर 32 ब्रांच में भेजा गया। जांचकर्ताओं को पता चला कि बैंक अकाउंट बिना किसी विभागीय मंज़ूरी के गैर कानूनी तरीके से खोला गया था। कोई FD नहीं बनाई गई; इसके बजाय, फ़र्ज़ी डेबिट नोट और जाली ट्रांज़ैक्शन का इस्तेमाल करके पैसे को सुनियोजित तरीके से शेल कंपनियों (फ़र्ज़ी कंपनियों) में ट्रांसफर कर दिया गया।
असर: कुमार की हरकतों के कारण अकेले HSPCB अकाउंट से लगभग ₹169 करोड़ का नुकसान हुआ। CBI ने बताया कि इस बड़े घोटाले से प्रभावित किसी भी सरकारी विभाग को हुआ यह सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान था।
बड़ी जांच का संदर्भ -
तीसरे IAS अधिकारी की गिरफ़्तारी: प्रदीप कुमार इस मामले में गिरफ़्तार होने वाले तीसरे सीनियर अफ़सर हैं; उनसे पहले IAS अधिकारी राम कुमार सिंह और पंकज अग्रवाल को गिरफ़्तार किया जा चुका है।
बड़े नेटवर्क का खुलासा: CBI ने इस घोटाले के सिलसिले में पहले ही 17 लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस कथित साज़िश में IDFC फ़र्स्ट बैंक और AU स्मॉल फ़ाइनेंस बैंक के कम से कम छह बैंक अधिकारी, राज्य के सरकारी कर्मचारी, प्राइवेट कंपनियाँ और बाहरी लोग शामिल हैं।
बढ़ती जाँच: कई विभागों से जुड़े इस बड़े घोटाले की जाँच हरियाणा राज्य विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो से CBI को सौंप दी गई थी। जांच का दायरा अब बढ़ गया है और इसमें चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) जैसे केंद्र शासित प्रदेश के निकायों से जुड़े गबन के मामले भी शामिल हो गए हैं। गिरफ्तारी के बाद, पंचकूला की एक विशेष CBI अदालत ने एजेंसी को कुमार की कस्टडी सौंप दी, ताकि आगे पूछताछ की जा सके और अपराध से हासिल बाकी रकम का पता लगाया जा सके। NBC 24 के लिए अफ़ीफ़ा निज़ामी की रिपोर्ट ।